जब हम सरकारी विद्यालयों के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों की बात करते हैं, तो मध्याह्न भोजन योजना उनके दिन का एक अहम हिस्सा होती है। यह स्पष्ट है कि बच्चों का समुचित पोषण ही उनके स्वस्थ विकास, बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य का आधार है। इसी परिकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए झारखंड के रांची जिले में एक बेहद अभिनव पहल की शुरुआत हुई है सुपोषण वाटिका।
जिला शिक्षा अधीक्षक, श्री बादल राज के कुशल मार्गदर्शन और प्रेरक पहल से शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट आज सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल रहा है। यह सिर्फ एक बागवानी प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि चुनौतियों को अवसरों में बदलने का एक शानदार उदाहरण है। जमीन नहीं, तो दीवारों और छतों पर उगी हरियाली इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत इसका लचीलापन और नवाचार है।
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नई सोच: प्लेट टू स्लेट (Plate to Slate) पुस्तक की रचना
जब विचार और संस्कार बचपन की कच्ची मिट्टी में बोए जाते हैं, तो वे जीवनभर के लिए अमिट बन जाते हैं। यदि शुरुआती उम्र से ही बच्चों को प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का पाठ पढ़ाया जाए, तो वे प्रकृति को सिर्फ उपभोग की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन का आधार मानेंगे। उनमें जल, वायु और मिट्टी जैसी प्राकृतिक संपदाओं के प्रति स्वाभाविक उत्तरदायित्व का भाव जागेगा। बड़े होकर वे केवल डिग्री-धारी पेशेवर नहीं, बल्कि एक संवेदनशील, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनेंगे जो विकास और पर्यावरण के संतुलन को प्राथमिकता देंगे।
इसी दूरदर्शी दृष्टि और धरातलीय अनुभवों को शब्द रूप दिया है परमानंद कुमार (सहायक अध्यापक, राजकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय लेम, कांके ) ने अपनी चर्चित पुस्तक प्लेट टू स्लेट (Plate to Slate) में। यह पुस्तक केवल कागज़ों पर लिखा गया सिद्धांत नहीं है, बल्कि कक्षा, रसोई, खेल के मैदान और प्रकृति के बीच घटे जीवंत अनुभवों का एक दस्तावेज है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे बच्चों की थाली (Plate) से मिलने वाला पोषण और उनके स्लेट (Slate) पर उकेरी जाने वाली शिक्षा आपस में जुड़कर एक सर्वांगीण व्यक्तित्व का निर्माण करती है।

यह पुस्तक क्यों महत्वपूर्ण है?
शिक्षकों के लिए यह कक्षा और विद्यालय परिसर में ऐसे नवाचारों को लागू करने की एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका है, जो पढ़ाई को प्रकृति से जोड़ती है। यह विद्यार्थियों को उनमें जिज्ञासा, श्रम के प्रति सम्मान और पर्यावरण के प्रति अपनत्व जगाने वाली एक प्रेरणादायक सहचरी है। अभिभावकों के लिए यह एक दृष्टिकोण प्रदान करती है कि कैसे घर के वातावरण में बच्चों को आत्मनिर्भर और प्रकृति-सचेत बनाया जाए।
प्लेट टू स्लेट (Plate to Slate) केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत है। यह आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाती है कि स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण कोई अलग-अलग विषय नहीं हैं, बल्कि ये एक समृद्ध जीवनशैली के अभिन्न अंग हैं। यह कृति निसंदेह एक स्वस्थ, आत्मनिर्भर और पर्यावरण-संवेदनशील समाज के निर्माण में एक मील का पत्थर साबित होगी।
सुपोषण वाटिका का उद्देश्य क्या है ?
सुपोषण वाटिका केवल स्कूलों या परिसरों में पेड़-पौधे लगाने का एक जरिया नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और जीवन-मूल्यों का एक अद्भुत संगम है। इसका मूल उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ समुदाय को जागरूक बनाना है। स्कूल में सुपोषण वाटिका से प्रेरित होकर बच्चे अपने घरों और गाँवों में भी किचन गार्डन बनाने के लिए माता-पिता को प्रोत्साहित करते है। इससे पूरे समुदाय में पोषण जागरूकता फैलती है।
सुपोषण वाटिका का सबसे प्रत्यक्ष उद्देश्य मिड-डे मील के लिए जैविक, ताज़ी और कीटनाशक-मुक्त हरी सब्जियाँ व फल उपलब्ध कराना है। उगाई गई हरी पत्तेदार सब्जियों और मौसमी फलों से बच्चों को आवश्यक विटामिन्स और मिनरल्स मिलते हैं, जो बच्चों में कुपोषण और खून की कमी को दूर करने में मददगार है।
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