स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड सरकार द्वारा राज्य के प्राथमिक, मध्य और उच्च विद्यालयों के शिक्षकों के स्थानांतरण की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस संबंध में विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला शिक्षा अधीक्षकों को दिशा-निर्देश जारी किए है।
स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए विभाग ने आदेश दिया है कि ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर वर्तमान में विद्यालयों में स्वीकृत पद और कार्यरत शिक्षक के डेटा को तत्काल फ्रीज किया जाए। डेटा फ्रीज होने के बाद ही रिक्तियों की वास्तविक संख्या स्पष्ट हो सकेगी और स्थानांतरण की कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
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स्थानांतरण प्रणाली
सामान्य स्थानांतरण की प्रक्रिया से पूर्व स्थापना समिति छात्र-शिक्षक अनुपात का आकलन करेगी। जिन विद्यालयों में स्वीकृत पद से अधिक शिक्षक कार्यरत होंगे, उन्हें आवश्यकता वाले विद्यालयों में विषयवार स्थानांतरित किया जाएगा। अतिरिक्त शिक्षकों का चयन विद्यालय में उनके सेवा काल के आधार पर होगा और उनकी प्राथमिकता सूची कंडिका-6 के प्रावधानों के अनुसार बनाई जाएगी।
शिक्षकों का यह स्थानांतरण जिले के भीतर ही किया जाएगा। इसके लिए पूर्व में निर्धारित जोनल प्रणाली को आधार बनाया गया है। शिक्षकों को उनके वर्तमान जोन से दूसरे जोन में स्थानांतरण के लिए प्राथमिकता और रिक्ति के आधार पर अवसर दिया जाएगा।
जोन आधारित स्थानांतरण नियम प्राचार्य, प्रधानाध्यापक और सभी संवर्ग के शिक्षकों पर समान रूप से लागू होगा। ई-विद्यावाहिनी पोर्टल के माध्यम से डेटा संकलन और अंकों के आधार पर स्थानांतरण की सूची तैयार की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की कमी वाले विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
झारखण्ड टीचर ट्रांसफर नियमावली
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड सरकार ने राज्य के सरकारी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक (मध्य), माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्राचार्य, प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों के स्थानांतरण नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। नई नियमावली के तहत अब जोन आधारित स्थानांतरण नीति लागू की गई है।
पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए राज्य के भौगोलिक और सेवा क्षेत्रों को पाँच जोन में विभाजित किया गया है। स्थानांतरण की पात्रता और वरीयता तय करने के लिए प्रत्येक जोन के लिए विशिष्ट अंक निर्धारित किए गए है।
शिक्षकों के स्थानांतरण हेतु जोन के अनुसार अंकों का निर्धारण निम्न प्रकार से किया गया है-
| जोन (Zone) | श्रेणी/विवरण | निर्धारित अंक |
| जोन 1 | शहरी एवं सुगम क्षेत्र | 5 अंक |
| जोन 2 | अर्ध-शहरी क्षेत्र | 8 अंक |
| जोन 3 | ग्रामीण क्षेत्र | 10 अंक |
| जोन 4 | दूरस्थ क्षेत्र | 12 अंक |
| जोन 5 | अति दूरस्थ क्षेत्र | 15 अंक |
समान अंक होने पर स्थानांतरण हेतु प्राथमिकता के मानक
यदि किसी एक विद्यालय के लिए एक से अधिक शिक्षकों के आवेदन प्राप्त होते हैं या दो या दो से अधिक शिक्षकों के अंक समान होते हैं, तो स्थानांतरण हेतु प्राथमिकता का निर्धारण निम्न वरियता क्रम के अनुसार किया जाएगा-
- ● दिव्यांग/निशक्त श्रेणी : प्रथम प्राथमिकता उन शिक्षकों को दी जाएगी जो दिव्यांगता की श्रेणी में आते हैं।
- ● जोन-5 में कार्यरत शिक्षक : द्वितीय प्राथमिकता उन शिक्षकों को मिलेगी जो वर्तमान में जोन-5 में पदस्थापित हैं।
- ● महिला शिक्षिका : इसके पश्चात महिला शिक्षिकाओं को वरियता प्रदान की जाएगी।
- ● पुरुष शिक्षक : अंत में पुरुष शिक्षकों को विचार क्षेत्र में रखा जाएगा।
उपरोक्त प्राथमिकता क्रम और अधिकतम प्राप्त अंकों के आधार पर ही संबंधित शिक्षक या शिक्षिका को वांछित विद्यालय में पदस्थापित किया जाएगा।
रिक्तियों का निर्धारण और पदस्थापन के नए नियम
रिक्तियों को भरने और शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विभाग ने निम्नलिखित प्राथमिकताएँ और नियम तय किए है –
- ● एकल शिक्षक वाले स्कूलों को प्राथमिकता – सबसे पहले उन स्कूलों में रिक्त पदों को भरा जाएगा जहाँ विद्यार्थियों का नामांकन 60 या उससे अधिक है, लेकिन वहाँ केवल एक ही शिक्षक कार्यरत है।
- ● पदों का समानुपातिक वितरण – जिले में जितने भी शिक्षक उपलब्ध हैं, उन्हें सभी स्कूलों में इस तरह बाँटा जाएगा कि जिले के कुल स्वीकृत पदों और कार्यरत शिक्षकों का अनुपात बना रहे। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि किसी एक स्कूल में बहुत ज्यादा और किसी में बहुत कम शिक्षक न हो।
- ● 50% शिक्षकों की अनिवार्यता – यह सुनिश्चित किया जाएगा कि राज्य के प्रत्येक विद्यालय में शिक्षकों के सभी श्रेणियों के कुल स्वीकृत पदों में से कम से कम 50% पद अनिवार्य रूप से भरे हो।
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