प्रारंभिक सरकारी स्कूलों में फाइनल परीक्षाएं खत्म हो चुकी हैं। अब बच्चे बेहतर परिणामों के साथ अपनी अगली कक्षा में जाएंगे। बच्चों ने पूरे साल पढ़ाई में काफी मेहनत की है। किताबी ज्ञान के अलावा बच्चों ने कई अन्य गतिविधियों और कार्यक्रमों से भी बहुत कुछ सीखा। इनमें मुख्य रूप से #CulturalConnect, PROJECT RAIL, #RanchiSpeaks, IDEAL NEP, सीटी बजाओ, पढ़ो और बढ़ो, सुपोषण वाटिका, #Vocabthon, सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी और ग्रुप डिस्कशन जैसे शानदार कार्यक्रम शामिल रहे।
पूरे साल की इस मेहनत के बाद अब बच्चों के मनोरंजन का समय आ गया है। इसके लिए स्कूलों में ‘वार्षिक महोत्सव‘(Annual Day) मनाया जाएगा। यह महोत्सव बच्चों के अंदर छिपी प्रतिभा को निखारने और उन्हें एक खुला मंच देने का काम करेगा। मंच से मिलने वाली तालियों की गड़गड़ाहट, इन बच्चों को जीवन की हर बड़ी परीक्षा में अव्वल आने की प्रेरणा देगी।
इस दिशा में रांची के जिला शिक्षा अधीक्षक श्री बादल राज ने एक शानदार पहल की है। उनके निर्देश पर आगामी 25 मार्च को रांची जिले के सभी प्राथमिक विद्यालयों में वार्षिक महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस खास कार्यक्रम में जिले के सभी सरकारी, गैर-सरकारी और सहायता प्राप्त (अल्पसंख्यक सहित) स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लेंगे।
इस कार्यक्रम को रांची के उपायुक्त श्री मंजुनाथ भजंत्री की स्वीकृति मिल चुकी है। साथ ही, रांची के उप विकास आयुक्त श्री सौरभ कुमार भुवानिया ने सभी स्थानीय जनप्रतिनिधियों को एक पत्र लिखा है। इसमें जिला परिषद् सदस्य, प्रमुख, मुखिया, ग्राम प्रधान, वार्ड सदस्य और पार्षद शामिल है।
पत्र में उनसे अनुरोध किया गया है कि वे अपने क्षेत्र के सरकारी स्कूलों के वार्षिकोत्सव में अतिथि के रूप में जरूर शामिल हों। उनके आने से छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों का उत्साह बढ़ेगा। इस अवसर पर अतिथि कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा भी करेंगे। इनमें संस्कृति को बढ़ावा देना, बच्चों की नियमित उपस्थिति, मध्याह्न भोजन और सरकारी स्कूलों की सुविधाएँ शामिल हैं। इसके अलावा, मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा और सरकारी स्कूलों पर समाज का भरोसा बढ़ाने जैसे विषयों पर भी बात की जाएगी।
वार्षिक महोत्सव में कौन-कौन से कार्यक्रम होंगे ?
रांची जिला सांस्कृतिक रूप से विविध होने के बावजूद, यहाँ की स्थानीय परंपराओं, लोकगीतों, नृत्यों और संगीत में एक गहरी एकता है। यहाँ का स्थानीय गीत-संगीत लोगों के रोज़मर्रा के जीवन में गहराई से जुड़ा है। इस क्षेत्र की संस्कृति इतनी समृद्ध है कि यहाँ चलना ही नृत्य है, बोलना ही गीत है और पेड़-पौधों की सरसराहट को ही संगीत माना जाता है। यही कारण है कि यहाँ के बच्चे अपनी इस संस्कृति से स्वाभाविक रूप से परिचित होते हैं। दूर किसी गाँव में बजते बाजे की आवाज़ सुनकर वे खेत-खलिहानों में ही झूम उठते हैं। झूमर गाते समय वे इतने उत्साहित होते हैं कि छाती और पेट पर ही ढोलक और नगाड़े जैसी थाप देकर लय बनाने लगते हैं। बच्चों की इसी स्वाभाविक सांस्कृतिक प्रतिभा और परिवेश को ध्यान में रखते हुए, वार्षिकोत्सव के लिए निम्नलिखित कार्यक्रम तय किए गए है-
1️⃣सांस्कृतिक एवं रंगमंच प्रस्तुतियां–
- ➔ झारखण्ड के स्थानीय लोक नृत्य (समूह एवं व्यक्तिगत)
- ➔ झारखण्ड के पारंपरिक लोक संगीत की प्रस्तुति
- ➔ सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता नाटक मंचन (विषय: डायन प्रथा, बाल-विवाह, नशामुक्ति, मानव तस्करी, असाक्षरता इत्यादि)
2️⃣साहित्यिक एवं वैचारिक प्रतियोगिताएं
- ➔ झारखण्ड के महापुरुषों के जीवन पर आधारित भाषण प्रतियोगिता
- ➔ RanchiSpeaks विषय पर विशेष भाषण प्रतियोगिता
- ➔ स्वरचित कविता पाठ
- ➔ सामान्य ज्ञान / क्विज प्रतियोगिता
3️⃣कला एवं रचनात्मकता
- ➔ स्थानीय कला, चित्रकला एवं हस्तशिल्प का आयोजन/प्रदर्शनी
- ➔ फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता (स्थानीय वेशभूषा और संस्कृति को प्राथमिकता)
4️⃣शारीरिक सौष्ठव एवं अन्य कार्यक्रम
- ➔ योग संबंधी विशेष प्रदर्शन
- ➔ अन्यान्य (अन्य विविध प्रस्तुतियां)
वार्षिक महोत्सव से लाभ
मार्च का महीना और फाइनल परीक्षाओं का समापन स्कूली बच्चों के लिए यह समय साल भर की कड़ी मेहनत के बाद एक लंबी राहत की सांस लेने का होता है। अमूमन प्राइवेट स्कूलों में परीक्षाओं के बाद वार्षिक महोत्सव की भारी धूम देखने को मिलती है। लेकिन अब झारखंड के रांची जिले के सभी सरकारी स्कूलों में भी इस परंपरा को अनिवार्य और भव्य रूप से लागू किया गया है। यह केवल एक दिन का जश्न नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवेश से आने वाले बच्चों के सर्वांगीण विकास का एक बेहद मजबूत आधार है।
झारखंड की माटी में कला और संस्कृति रची-बसी है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों से आते हैं। इन बच्चों में स्थानीय सांस्कृतिक, पारंपरिक नृत्यों और लोकगीतों की अद्भुत समझ होती है, लेकिन संसाधनों के अभाव में यह प्रतिभा स्कूल की चारदीवारी तक ही सिमट कर रह जाती है। वार्षिक महोत्सव इन छिपी हुई प्रतिभाओं को एक खुला मंच प्रदान करता है, जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी कला का प्रदर्शन कर सकते हैं। इससे न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि झारखंड की समृद्ध आदिवासी और मूलवासी संस्कृति का भी संरक्षण होता है।
सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने में विद्यालय प्रबंधन समिति और अभिभावकों की भागीदारी सबसे बड़ी चुनौती रही है। जब स्कूल में कोई बड़ा और रंगारंग आयोजन होता है, तो गांव के लोग, अभिभावक और पंचायत प्रतिनिधि खुद-ब-खुद स्कूल से जुड़ते हैं। जब एक दिहाड़ी मजदूर या किसान माता-पिता अपने बच्चे को मंच पर गाते-नाचते या मेडल पहनते देखते हैं, तो स्कूल के प्रति उनका सम्मान और भरोसा कई गुना बढ़ जाता है।
समाज में अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि सरकारी स्कूलों में केवल मिड-डे मील बंटता है और पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति होती है। वार्षिक महोत्सव इस नकारात्मक धारणा को तोड़ने का सबसे कारगर हथियार है। यह समाज को संदेश देता है कि सरकारी स्कूलों में भी बच्चों का ओवरऑल डेवलपमेंट हो रहा है। इस सकारात्मक छवि का सीधा फायदा स्कूलों को अगले शैक्षणिक सत्र में मिलता है, जिससे नए बच्चों का नामांकन बढ़ता है और ड्रॉपआउट रेट में कमी आती है।
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