झारखंड सरकार ने यह प्रावधान किया है कि सेवा अवधि पूर्ण होने से पूर्व भी किसी सरकारी सेवक को अनिवार्य सेवानिवृत्त किया जा सकता है। इसके लिए सेवा संहिता में शिक्षक अनिवार्य सेवानिवृत्ति नियम (Teachers’ Compulsory Retirement Rules) बनाया गया है।
आज के इस ब्लॉग में हम आपको झारखंड और बिहार सरकार के अनिवार्य सेवानिवृत्ति नियम (Compulsory Retirement Rules) के बारे में बहुत ही आसान और सरल भाषा में बताएंगे। अगर आप सरकारी कर्मचारी या शिक्षक हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है।
इसलिए आप इस लेख को शुरू से अंत तक जरूर पढ़ें, ताकि आपको पता चल सके कि किन परिस्थितियों में सरकार किसी कर्मचारी को अनिवार्य रूप से रिटायर कर सकती है और कब कोई कर्मचारी खुद भी स्वेच्छा से रिटायर हो सकता है।
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सेवानिवृत्ति नियम (retirement rules) क्या है ?
झारखण्ड सरकार के कर्मचारी और सरकारी प्राथमिक, मध्य एवं उच्च विद्यालयों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष निर्धारित है। सरकारी सेवक का 60 पूर्ण होने के पश्चात् अपने जन्म माह की अंतिम तिथि को सेवानिवृत्त होते हैं। परंतु, यदि किसी सरकारी सेवक की जन्मतिथि माह की पहली तारीख हो, तो वह अपने जन्म माह के पूर्ववर्ती माह की अंतिम तिथि को सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
झारखण्ड सरकार, वित्त विभाग के संकल्प संख्या 1930, दिनांक 07-08-2025 के आदेशानुसार, यदि कोई सरकारी सेवक 30 जून अथवा 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होता है और उसने बिना किसी बाधा के एक वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली है, तो उसे एक काल्पनिक वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ देते हुए सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान किया जाएगा।
शिक्षक अनिवार्य सेवानिवृत्ति नियम
झारखंड सेवा नियम 74(क) के अनुसार, अगर कोई सरकारी शिक्षक/कर्मचारी अपनी पहली नौकरी से 21 साल की ड्यूटी पूरी कर लेता है और कुल मिलाकर 25 साल की सेवा कर चुका है, तो सरकार चाहे तो उसे रिटायर (नौकरी से हटा) कर सकती है।
अगर सरकार को लगे कि उसकी काम करने की क्षमता या व्यवहार अच्छा नहीं है और उसे नौकरी पर रखना ठीक नहीं है, तो उसे जबरन रिटायर कर दिया जाएगा।
ऐसे मामले में उस सरकारी कर्मचारी को कोई खास मुआवजा नहीं मिलेगा।
सरल शब्दों में यह है कि 25 साल की नौकरी के बाद अगर सरकार को लगे कि शिक्षक/कर्मचारी अच्छा काम नहीं कर रहा है या उसका आचरण सही नहीं है, तो सरकार उसे जबरन रिटायर कर सकती है।
इस नियम ‘ख’ (i) के अनुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी चाहे तो खुद भी रिटायर (नौकरी छोड़) हो सकता है। इसके लिए उसे अपने अधिकारी को कम-से-कम 3 महीने पहले लिखित में बता देना होगा। वह यह रिटायरमेंट उस दिन ले सकता है जब-
- ↪️ उसकी नौकरी 30 साल पूरी हो जाए, या
- ↪️ उसकी उम्र 50 साल हो जाए, या
- ↪️ इसके बाद किसी भी दिन, जो वह अपनी चिट्ठी में लिखे।
आसान भाषा में कहें तो- 30 साल नौकरी या 50 साल उम्र पूरी होने के बाद, कोई भी सरकारी कर्मचारी 3 महीने पहले बताकर खुद रिटायर हो सकता है।
अनिवार्य सेवानिवृत्ति नियम (Compulsory Retirement Rules) के उपनियम ‘ख’ (ii) के अनुसार, सरकार चाहे तो किसी भी सरकारी सेवक को जबरन रिटायर कर सकती है। इसके लिए सरकार उसे पहले से 3 महीने लिखित में बता देगी, या फिर उसे 3 महीने का वेतन और भत्ता एक साथ दे देगी। यह रिटायरमेंट तब हो सकता है जब –
- ↪️ कर्मचारी ने 30 साल की नौकरी पूरी कर ली हो, या
- ↪️ उसकी उम्र 50 साल हो गई हो, या
- ↪️ इसके बाद किसी भी दिन, जो सरकार तय करे।
अगर सरकार को लगे कि लोकहित में अर्थात जनता और सरकार के भले के लिए कर्मचारी को सेवा से हटाना जरूरी है, तो उसे रिटायर कर दिया जाएगा।
अनिवार्य सेवानिवृत्ति नियम (Compulsory Retirement Rules) के उपनियम ‘ख’ (iii) के अनुसार, अगर कोई सरकारी सेवक – खुद अपनी इच्छा से 30 साल की नौकरी या 50 साल उम्र पूरी होने पर रिटायर होता है , या सरकार उसे जनता और सरकार के भले अर्थात लोकहित में रिटायर कर देती है, तो ऐसे शिक्षक / कर्मचारी को पेंशन और रिटायरमेंट पर मिलने वाला पैसा मिलेगा कहने का मतलब कि दोनों ही स्थिति में उसे पेंशन और ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा।
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