Supreme Court TET Order :- सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के TET को लेकर एक फैसला दिया है, जिस पर शिक्षकों के बीच काफी नाराज़गी देखी जा रही है। जो शिक्षक पहले से TET पास कर चुके हैं, उन्हें यह फैसला सही लग रहा है। लेकिन पुराने शिक्षक, जिनकी नियुक्ति के समय TET का कोई प्रावधान नहीं था, इस फैसले से असहमत हैं। उनका कहना है कि इस निर्णय का सबसे अधिक असर उन्हीं पर पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट TET फैसला क्या है ?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जिन शिक्षकों की नौकरी में पाँच साल या उससे कम समय बचा है, उन्हें TET परीक्षा पास करना जरूरी नहीं है। ऐसे शिक्षक बिना TET पास किए भी प्रमोशन प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन जिन शिक्षकों की सेवा में पाँच साल से अधिक समय बचा है, उन्हें अगले दो वर्षों के भीतर TET परीक्षा पास करना अनिवार्य है। यदि वे दो साल के अंदर TET पास नहीं करते हैं, तो उनकी नौकरी समाप्त हो सकती है। साथ ही, जिन शिक्षकों की सेवा में पाँच साल से अधिक समय शेष है, उन्हें TET पास किए बिना प्रमोशन नहीं दिया जाएगा, जबकि पाँच साल से कम सेवा शेष रहने वाले शिक्षकों को बिना TET पास किए भी प्रमोशन दिया जा सकता है।
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शिक्षक नियुक्ति हेतु न्यूनत्तम योग्यता नियम क्या है ?
पहले शिक्षक की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता मैट्रिक या उसके समकक्ष रखी गई थी। बाद में शिक्षकों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय करने का अधिकार एनसीटीई (NCTE) को दे दिया गया। इसके बाद RTE Act, 2009 की धारा 23 के तहत पहली बार शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता निर्धारित की गई। अब प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए न्यूनतम योग्यता इंटरमीडिएट या उसके समकक्ष कर दी गई है। आगे चलकर एनसीटीई ने एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षक बनने और प्रमोशन पाने के लिए TET पास करना अनिवार्य कर दिया गया।
2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या असर होगा?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, वे शिक्षक अभी भी चिंता में हैं जो TET पास नहीं हैं और जिनकी नौकरी में 5 साल से ज्यादा का समय बचा है। वहीं, जिनकी नौकरी केवल 5 साल या उससे कम बची है, उन्हें कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। उन्हें न तो TET पास करना होगा और न ही उनके प्रमोशन पर कोई रोक लगेगी।
RTE एक्ट (शिक्षा का अधिकार कानून) 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ था और शिक्षकों के लिए TET पास करने की शर्त अगस्त 2010 में जोड़ी गई थी। इससे पहले नियुक्ति के लिए TET की कोई जरूरत नहीं थी। चूँकि 1 अप्रैल 2010 से पहले यह कानून अस्तित्व में ही नहीं था, इसलिए इसकी प्रबल संभावना है कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET पास करने की अनिवार्यता से छूट मिल जाएगी।
RTE Act के तहत छात्र-शिक्षक अनुपात क्या है?
RTE Act के तहत प्राथमिक कक्षाओं के लिए छात्र-शिक्षक अनुपात निम्न प्रकार है –
| छात्र संख्या | शिक्षक संख्या |
|---|---|
| 60 तक | 2 |
| 61 से 90 के मध्य | 3 |
| 91 से 120 के मध्य | 4 |
| 121 से 200 के मध्य | 5 |
| 150 के ऊपर | 5+1 (एक) प्रधानाध्यापक |
| 200 के ऊपर | छात्र-शिक्षक अनुपात (प्रधानाध्यापक को छोड़कर) 40 से अधिक नहीं होगा |
उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रत्येक 35 छात्र पर एक शिक्षक होगा।
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