अब बच्चों को बिना किताब और कॉपी के विद्यालय आने पर डाँट नहीं मिलेगी। पाठ्यपुस्तकों के बोझ को कम करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूली शिक्षा में बदलाव किया गया है। अब बच्चों को बिना किताब और कॉपी-पेन के भी सीखने का अवसर मिलेगा। इसके तहत झारखण्ड के सरकारी स्कूलों में हर शनिवार को “बस्ता रहित दिवस” (School Bagless Day) होगा, जिस दिन बच्चे बिना स्कूल बैग के स्कूल आएंगे।
वर्तमान में प्रत्येक जिले के डायट केंद्र में शिक्षकों को C-CPD प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत बस्ता रहित दिवस (Bagless Day) के महत्व और उसके क्रियान्वयन की जानकारी भी प्रदान की जाती है।
बैगलेस डे का उद्देश्य क्या है ?
बस्ता रहित दिवस (School Bagless Day) का उद्देश्य बच्चों को किताबों के बोझ से मुक्त करके सीखने को रोचक और आसान बनाना है। इसका मकसद बच्चों का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, नैतिक और सांस्कृतिक विकास करना है, ताकि वे भाषा, पढ़ाई और गणित में मजबूत बन सकें। इसके साथ ही बच्चों को अच्छे व्यवहार, नैतिकता, स्वच्छता, समूह में काम करने और एक-दूसरे की मदद करना भी सिखाया जायेगा ।
बच्चे कैसे सीखेंगे ?
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड सरकार द्वारा एक कैलेंडर तैयार किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक शनिवार को होने वाली गतिविधियों का निर्धारण किया जाएगा। इस दिन बच्चों को खेल, गतिविधियों और खोज के माध्यम से पढ़ाया जाना है। इसमें अक्षर, भाषा, गिनती, रंग, आकार पहचानने जैसी चीज़ें सिखाई जाएगी । इंडोर और आउटडोर खेल, पहेलियाँ, चित्र बनाना, पेंटिंग, शिल्प, नाटक, कठपुतली, संगीत जैसी रचनात्मक गतिविधियाँ कराई जानी है ।
झारखंड के अलावा उत्तराखंड में भी यह कार्यक्रम शुरू होने वाला है। इसके अतिरिक्त, गुजरात में यह पहले ही प्रारंभ हो चुका है, जहाँ प्रत्येक शनिवार को “बस्ता रहित दिवस” (Bagless Day) के तहत बच्चे बिना किताब और कॉपी के स्कूल आते हैं।