झारखंड की प्रारंभिक स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। राजधानी रांची में पहली बार फाइनल परीक्षाओं से ठीक पहले Govt Schools Pre-SA 2 Test का आयोजन किया जा रहा है। इस अनूठी पहल का सीधा असर बच्चों की उपस्थिति पर पड़ा है, जहाँ छात्र भारी संख्या (95 %) में उत्साह के साथ स्कूल पहुंच रहे है। शिक्षा विभाग की इस कोशिश का मुख्य उद्देश्य बच्चों के मन से मुख्य परीक्षा का डर निकालना है। यह Govt Schools Pre-SA 2 Test उन्हें अपनी तैयारियों को परखने का एक सुनहरा मौका दे रहा है, ताकि वे फाइनल रिजल्ट में बेहतर प्रदर्शन कर सके।

श्री बादल राज, जिला शिक्षा अधीक्षक, रांची
“हमारा उद्देश्य केवल परीक्षा लेना नहीं, बल्कि बच्चों के मन से ‘परीक्षा का डर’ खत्म करना है। Pre-SA 2 टेस्ट फाइनल एग्जाम से पहले एक वार्म-अप की तरह है, जिससे बच्चे न केवल अपनी तैयारी परख सकेंगे, बल्कि मुख्य परीक्षा में पूरे आत्मविश्वास के साथ शामिल हो सकेंगे। स्कूलों में बच्चों की बढ़ती उपस्थिति यह बताती है कि वे इस बदलाव को सकारात्मक रूप से ले रहे हैं।” – श्री बादल राज, जिला शिक्षा अधीक्षक, रांची
Pre-SA 2 परीक्षा क्यों महत्वपूर्ण है?
रांची के सरकारी स्कूलों में आयोजित होने वाली Pre-SA 2 परीक्षा केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि फाइनल परीक्षा की सफलता की कुंजी है। यह परीक्षा छात्रों के लिए मुख्य एग्जाम से पहले एक पूर्वाभ्यास की तरह कार्य कर रही है। इसका सबसे बड़ा महत्व यह है कि इससे छात्रों के मन में बैठा परीक्षा का अकारण भय और तनाव दूर होता है, जिससे उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है। इस टेस्ट के माध्यम से बच्चे न केवल प्रश्न पत्र के पैटर्न और समय-प्रबंधन की बारीकियों को समझते हैं, बल्कि उन्हें आत्म-मूल्यांकन का भी सुनहरा अवसर मिलता है। वे फाइनल परीक्षा से पहले ही जान जाते हैं कि उनकी तैयारी में कहाँ कमी रह गई है, जिसे समय रहते सुधारा जा सकता है। यही कारण है कि शिक्षा विभाग की इस पहल को रिजल्ट सुधारने की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
इसके अलावे इस टेस्ट के नतीजों से शिक्षकों को यह पहचानने में आसानी होगी कि कौन सा बच्चा किस विषय में पिछड़ रहा है, ताकि फाइनल एग्जाम से पहले उस पर विशेष ध्यान दिया जा सके।

सरकारी विद्यालयों की नई शैक्षणिक गतिविधियां
झारखंड की राजधानी रांची में सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए जिला शिक्षा विभाग पूरी प्रतिबद्धता के साथ जुटा हुआ है। शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने और इसे एक अलग मुकाम तक पहुँचाने की दिशा में जिला शिक्षा अधीक्षक, श्री बादल राज के नेतृत्व में निरंतर और सराहनीय प्रयास किए जा रहे हैं। उनका विजन केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि नवाचारी प्रयोगों के माध्यम से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए जिले में कई महत्वपूर्ण और अनूठे कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जो छात्रों के भविष्य को संवारने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। इन प्रमुख कार्यक्रमों का विवरण निम्नलिखित है –
सीटी बजाओ अभियान 2.0 (Seeti Bajao Abhiyan 2.0)
इस महत्वाकांक्षी अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में बच्चों की नियमित उपस्थिति और ठहराव को सुनिश्चित करना था। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए एक व्यापक सहभागिता मॉडल अपनाया गया, जिसमें जनप्रतिनिधियों, स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों, विद्यालय प्रबंधन समिति , माता समिति, बाल संसद, आंगनवाड़ी सेविका, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी और संकुल पदाधिकारियों को सक्रिय रूप से जोड़ा गया।
योजना के तहत पोषक क्षेत्र के बच्चों को उनके टोले के अनुसार समूहों में बांटकर उन्हें सीटी उपलब्ध कराई गई। इसका मकसद था कि बच्चे रोजाना स्कूल आते समय सीटी बजाते हुए आएं, जिससे अन्य साथी भी प्रेरित होकर एक साथ स्कूल पहुंचें। इस अनूठे प्रयोग को अभूतपूर्व सफलता मिली है। यही मुख्य कारण है कि आज Pre-SA 2 Test में बच्चों की उपस्थिति 95 फीसदी से भी अधिक दर्ज की गई है।
#RanchiSpeaks
एक ऐसा महत्वपूर्ण कार्यक्रम जो सरकारी स्कूलों में गूंजती आत्मविश्वास की नई आवाज़ बन गई। सीटी बजाओ अभियान के जरिए जब विद्यालयों में बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति और ठहराव सुनिश्चित हो गया, तब शिक्षा विभाग ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर अगला कदम बढ़ाया। इसी कड़ी में #RanchiSpeaks कार्यक्रम की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य बच्चों को सिर्फ कक्षा में बैठाना नहीं, बल्कि उन्हें मुखर बनाना था।
इस अनूठी पहल ने रांची जिले के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल दी है। ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों के बच्चे, जो अक्सर अपनी बात कहने में संकोच करते थे, अब इस मंच के माध्यम से निर्भीक और निडर होकर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं। इस कार्यक्रम ने बच्चों के मन में बसी वर्षों पुरानी झिझक और डर को जड़ से खत्म करने में आशातीत सफलता हासिल की है।
आज स्थिति यह है कि स्कूलों में प्रार्थना सभा हो या कक्षा, बच्चों के बीच बोलने की एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। कल तक जो बच्चे शिक्षक या बाहरी आगंतुकों को देखकर सहम जाते थे, आज वे पूरे आत्मविश्वास के साथ आँखों में आँखें डालकर संवाद कर रहे हैं। #RanchiSpeaks ने न केवल उनकी भाषा शैली सुधारी है, बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास में भी अहम भूमिका निभाई है। अब यह कहा जा सकता है कि रांची के सरकारी स्कूलों के बच्चे सिर्फ पढ़ते नहीं, बल्कि बोलते भी है।
कार्यक्रम की सफलता के पीछे इसकी सुव्यवस्थित योजना है। इस अभियान के तहत कक्षा 1 से 5 और कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक माह दो अलग-अलग विषय निर्धारित किए जाते हैं। छात्रों को बोलने का पर्याप्त अवसर मिले, इसके लिए महीने को दो भागों में बांटा गया है। महीने की 1 से 15 तारीख तक छात्र पहले विषय पर अपनी बात रखते हैं, जबकि 16 तारीख से महीने के अंत तक उन्हें दूसरे विषय पर बोलने का अभ्यास कराया जाता है। इस निरंतर अभ्यास से बच्चों की झिझक खत्म हो रही है और वे हर विषय पर अपनी राय रखने में सक्षम हो रहे है।
सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी
रांची जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में अब दिन की शुरुआत केवल प्रार्थना से नहीं, बल्कि सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी से हो रही है। इस अभिनव कार्यक्रम को प्रतिदिन प्रातःकालीन प्रार्थना सभा का एक अनिवार्य हिस्सा बना दिया गया है। इस पहल को सुव्यवस्थित रूप से चलाने के लिए जिला शिक्षा विभाग द्वारा प्रत्येक माह स्कूलों को 50 चयनित प्रश्नों और उनके उत्तरों की एक सूची उपलब्ध कराई जाती है। प्रार्थना सभा के दौरान शिक्षक बच्चों से इन्हीं में से प्रश्न पूछते हैं और न केवल उत्तर बताते हैं, बल्कि उसे विस्तार से समझाते भी है।
इस कार्यक्रम की गंभीरता को बनाए रखने के लिए तकनीक का भी बेहतरीन उपयोग किया जा रहा है। अधिकारी वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़कर सीधे बच्चों की मॉनिटरिंग करते हैं और उनसे सवाल पूछकर यह परखते हैं कि वे कितना सीख रहे हैं। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखकर उन्हें देश-दुनिया की सामान्य जानकारी से भी समृद्ध करना है, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके।
इसके अतिरिक्त, और भी कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रतिदिन संचालित किए जा रहे है।
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